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Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में आज बड़ी सफलता हासिल की गई, जब 50 लाख रुपये के इनामी नक्सली सहित कुल 27 सक्रिय माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ट्वीट कर इसे नक्सलवाद के अंत की दिशा में एक स्पष्ट संकेत बताया। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में कभी हिंसा और भय का साया था, आज वहां विकास, संवाद और विश्वास की नई रोशनी पहुंच रही है। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी पीएलजीए बटालियन नंबर 01 के हार्डकोर सदस्य भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने इसे "नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025" और "नियद नेल्ला नार" योजना की सफलता का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि शासन की संवेदनशील पहल, लगातार स्थापित हो रहे सुरक्षा शिविरों और वनांचलों में सरकार के प्रति बढ़ते विश्वास ने ही यह परिवर्तन संभव किया।
नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार - बस्तर अंचल में विश्वास, सुरक्षा और विकास का नया युग।
— Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) October 15, 2025
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में आज 50 लाख के इनामी नक्सली सहित कुल 27 सक्रिय माओवादियों का आत्मसमर्पण इस बात का स्पष्ट संकेत है कि नक्सलवाद अब अपने अंत की ओर अग्रसर है। जिन इलाकों में कभी हिंसा और भय…
मुख्यमंत्री ने सुरक्षा बलों की प्रशंसा करते हुए कहा कि पुलिस, डीआरजी, सीआरपीएफ, कोबरा और एसटीएफ ने अदम्य साहस और संयम के साथ इस संघर्ष को निर्णायक मोड़ पर पहुँचाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल आत्मसमर्पण नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीतियों और भटके हुए लोगों के प्रति अपनाई गई संवेदनशील दृष्टि का परिणाम है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी अब समाज का हिस्सा बनकर विकास में योगदान देंगे। यह कदम न केवल सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि प्रदेश में स्थायी शांति और सामूहिक विश्वास को मजबूत करने में भी सहायक होगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि इस सफलता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन का विशेष योगदान रहा है। उनका कहना है कि देश नक्सल मुक्त भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है और छत्तीसगढ़ इस मिशन में अहम भूमिका निभा रहा है। सुकमा जिले में यह आत्मसमर्पण कार्यक्रम राज्य और केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी को पुनर्वास के तहत रोजगार, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही उनके परिवारों को भी सहायता दी जाएगी, ताकि वे स्थायी रूप से समाज में शामिल हो सकें। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अंत में कहा, "यह केवल एक आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीतियों और संवेदनशील दृष्टि का परिणाम है। हम सभी मिलकर नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करेंगे और प्रदेश में शांति, विकास और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करेंगे।"
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